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योग के नाम पर सनातन धर्म की गरिमा से खिलवाड़ अस्वीकार्य

योग के नाम पर सनातन धर्म की गरिमा से खिलवाड़ अस्वीकार्य

अयोध्या केवल एक नगर नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। श्रीराम जन्मभूमि भारत की सांस्कृतिक चेतना, मर्यादा और सनातन परंपरा का प्रतीक है। ऐसे पवित्र स्थल पर होने वाला प्रत्येक कार्यक्रम गरिमा, मर्यादा और आध्यात्मिक मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए।

यदि योग के नाम पर कोई ऐसा कृत्य हुआ है जो अशोभनीय, अमर्यादित या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला है, तो उसे योग कहना ही योग की महान परंपरा का अपमान है। योग भारतीय ऋषियों की अमूल्य देन है। इसका उद्देश्य आत्मसंयम, शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और ईश्वर से जुड़ाव है, न कि प्रदर्शन, प्रचार या मनोरंजन।

सनातन धर्म सदैव मर्यादा, शालीनता और अनुशासन का संदेश देता है। किसी भी धार्मिक स्थल पर ऐसा कोई आयोजन नहीं होना चाहिए जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएँ आहत हों या मंदिर की पवित्रता पर प्रश्नचिह्न लगे। यदि किसी आयोजन में अनुशासनहीनता या अमर्यादित व्यवहार हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और जो भी दोषी हों, उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

यह भी आवश्यक है कि समाज किसी घटना पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसके सत्य तथ्यों की पुष्टि करे। अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। सत्य सामने आने के बाद ही जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

अयोध्या पूरे विश्व के लिए आस्था और आदर्श का केंद्र है। इसलिए वहाँ आयोजित प्रत्येक कार्यक्रम ऐसा हो जो सनातन संस्कृति की गरिमा, मर्यादा और आध्यात्मिक संदेश को सशक्त बनाए। धार्मिक स्थलों का उपयोग केवल श्रद्धा, साधना और संस्कृति के उत्थान के लिए होना चाहिए, न कि ऐसे कार्यों के लिए जिनसे विवाद उत्पन्न हो।

सनातन धर्म की रक्षा केवल नारों से नहीं, बल्कि मर्यादित आचरण, सत्य, अनुशासन और धर्मसम्मत व्यवहार से होगी। यही भगवान श्रीराम की शिक्षा भी है और यही भारत की सनातन परंपरा का वास्तविक स्वरूप है।

Gaon Ka Vikas
Author: Gaon Ka Vikas