धर्म की आड़ में ढोंग: भारतीय जनता पार्टी सनातन धर्म की रक्षा करने में पूर्णतः विफल?
संपादकीय
सनातन धर्म केवल मंदिरों, धार्मिक आयोजनों या भव्य कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। इसका मूल आधार सत्य, न्याय, करुणा, मर्यादा और धर्मानुसार आचरण है। यदि समाज में अन्याय, भ्रष्टाचार, पाखंड और कानून के असमान पालन को बढ़ावा मिलता है, तो केवल धार्मिक नारों या आयोजनों से धर्म की वास्तविक रक्षा नहीं हो सकती।
भारतीय जनता पार्टी स्वयं को सनातन धर्म और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की समर्थक बताती रही है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से जनता की अपेक्षाएँ भी अधिक होती हैं। यदि कहीं स्थानीय स्तर पर धार्मिक स्थलों की आड़ में अवैध गतिविधियाँ, पाखंड, भूमि विवाद या प्रशासनिक निष्क्रियता के आरोप सामने आते हैं, तो सरकार और प्रशासन से निष्पक्ष जाँच तथा कानून के समान अनुपालन की अपेक्षा की जाती है। किसी भी प्रकार के आरोपों का समाधान तथ्यों और विधिक प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।
धर्म के नाम पर पाखंड करने वाले लोग किसी भी समाज के लिए चुनौती हैं। यदि ऐसे मामलों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई न हो, तो लोगों का विश्वास शासन और प्रशासन दोनों पर प्रभावित हो सकता है। साथ ही, बिना पर्याप्त प्रमाण के किसी व्यक्ति, संस्था या राजनीतिक दल पर आरोप लगाना भी उचित नहीं है। लोकतंत्र में जवाबदेही के साथ-साथ निष्पक्षता भी उतनी ही आवश्यक है।
सनातन धर्म का संदेश सत्य और धर्म की विजय का है। इसलिए धर्म की रक्षा केवल प्रतीकों, नारों या भव्य आयोजनों से नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण शासन, पारदर्शी प्रशासन और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना से होती है। यही किसी भी सरकार और समाज की वास्तविक कसौटी है।
